

प्रशासनिक पक्षपात और पत्रकारों के उत्पीड़न के विरोध में कलेक्टर व एसपी को सौंपा ज्ञापन; निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग बुलंद
बलौदाबाजार। जिला मुख्यालय में पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस की एकतरफा कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। बुधवार को प्रेस क्लब बलौदाबाजार के बैनर तले जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि लोकतंत्र के प्रहरी सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो जनहित की आवाज दब जाएगी।
दोहरी कार्यप्रणाली पर गहरा रोष
प्रेस क्लब ने प्रशासन को सौंपे गए पत्र में जिले में व्याप्त “दोहरी पुलिसिया नीति” पर तीखी चिंता व्यक्त की। ज्ञापन के अनुसार, हाल के महीनों में जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ पत्रकारों द्वारा जनहित, भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को लेकर की गई शिकायतों पर पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके विपरीत, पत्रकारों के विरुद्ध की जाने वाली रंजिशपूर्ण और झूठी शिकायतों पर पुलिस विभाग असाधारण सक्रियता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई करने में जुट जाता है।
संविधान और अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को याद दिलाया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) देश के प्रत्येक नागरिक और विशेषकर पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है, लेकिन जिले में पत्रकारों के खिलाफ जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, वह चिंताजनक है।
“प्रेस क्लब केवल एक माध्यम के रूप में पीड़ितों के आवेदनों को प्रशासन तक पहुँचाने का कार्य करता है। लेकिन विडंबना यह है कि असली अपराधियों पर नकेल कसने के बजाय, पुलिस प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को ही बयान दर्ज कराने के नाम पर तलब कर रही है। यह न केवल पत्रकारों का मानसिक उत्पीड़न है, बल्कि उन्हें डराने-धमकाने की एक सोची-समझी साजिश है।”
प्रेस क्लब की प्रमुख मांगें:
निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच: पत्रकारों के विरुद्ध किसी भी शिकायत पर तब तक कोई वैधानिक कार्रवाई न की जाए, जब तक कि उच्चाधिकारियों द्वारा तथ्यों की सूक्ष्मता से जांच न कर ली जाए।
झूठी शिकायतों पर अंकुश: प्रतिशोधात्मक और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की सत्यता की जांच के बिना पत्रकारों को परेशान करना बंद हो।
प्रशासनिक प्रोटोकॉल: पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और उनके संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए जिला स्तर पर एक स्पष्ट ‘प्रशासनिक प्रोटोकॉल’ तैयार किया जाए।
त्वरित कार्रवाई: प्रेस क्लब या पत्रकारों द्वारा जनहित में दी गई शिकायतों पर पुलिस और प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित न्यायोचित कार्रवाई करे।
एकजुट हुए जिले के पत्रकार
इस अवसर पर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित जिले के वरिष्ठ और युवा पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से प्रेस क्लब अध्यक्ष नरेश गनशानी, सचिव दलजीत सिंह चावला, कोषाध्यक्ष राजेश्वर गिरी, वरिष्ठ पत्रकार विजय तिवारी, राघवेंद्र सिंह, राजा वालेचा, श्रावण ध्रुव, पुष्पकांत मेजर, मिथलेश वर्मा, गोविंद रात्रे, और लाकेश बघेल सहित अन्य सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए पत्रकारों के हितों की रक्षा का संकल्प लिया।
प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन पत्रकारों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता से विचार नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे।






